Thursday, 30 November 2017

II सूखा पीड़ित किसानों पर एक ग़ज़ल II

Posted by मंगलज्योति at November 30, 2017 0 Comments

सूखा पीड़ित किसानों पर एक ग़ज़ल
कवी देवमणि पांडेय जी की लिखी एक गजल "सूखा पीड़ित किसानों पर एक ग़ज़ल" आप सभी के लिए पढ़िए और अपना विचार जरूर रखिये !
 
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मौसम ने क़हर ढाया दहशत है किसानों में ,
दम तोड़ती हैं फ़सलें खेतों-खलिहानों में!


धरती की गुज़ारिश पर बरसे ही नहीं बादल ,
तब्दील हुई मिट्टी खेतों की चटानों में!!


थक हार के कल कोई रस्सी पे जो झूला है,
इक ख़ौफ़ हुआ तारी मज़दूर - किसानों में! 


क्यूं कैसे मरा कोई क्या फ़िक्र हुकूमत को,
पत्थर की तरह नेता बैठे हैं मकानों में!!


अब गांव की आँखों में बदरंग फ़िज़ाएं हैं ,
खिलती है धनक लेकिन शहरों की दुकानों में!


क्यूं रूठ गई कजरी दिल जिसमें धड़कता था,
क्यूं रंग नहीं कोई अब बिरहा की तानों में!!


 
कवि:देवमणि पांडेय

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