Saturday, 2 December 2017

बलात्कार एक संज्ञेय अपराध है।

Posted by मंगलज्योति at December 02, 2017 0 Comments

ऐसी खबरों पर अपना व्यक्तिगत विचार व्यक्तब्य रखना भी बड़ा मनहूस लगता हैं !कैसा दौर आ गया कलयुगी कि कुछ लोगों का शर्म हया खत्म हो चुका हैं !अगर एक औरत कही बाहर या बाजार जाती हैं तो वह हजारों वहसी नजरों से अपमानित हुआ करती हैं!वही आज के समय में पुरुषों की छवि भी कुछ इस तरह धुमिल हो चुका हैं कि हर महिला के शक वाली नजर के दायरे में बदनाम बेहयाई का जिम्मेदार सा होता हैं!
Pic.Rape case


*किसे कोसे ऐसी प्रवित्ति के लिए ?
*कौन सही जिम्मेदार हैं इसका ?
*किसको कैसी सजा दे दी जाय ?
*पहचान कैसे हो अच्छे खराब की?
*किसका भरोसा होना चाहिए ?




Pic-सन्मार्ग अखबार


एक व्यस्क हो तो दुश्मनी या कोई मन्सा भी कारण मान लेते पर छोटी बच्चियों से दरिंदगी मानसिक हवसी बिल्कुल माफी के लायक नही हैं! कोई दायरा न बचा जहां सम्मान का भाव सचमुच रह गया हो!इन्ही बातो को लेकर सोचा कुछ तथ्यों पर बतलाया जाये और अपनी जानकारी बढ़ाई जाये ताकि हम इन समस्याओं का सही विकल्प समझ सके और खुद को सुरक्षित कर सके !
Pic-सन्मार्ग अखबार




बलात्कार के बारे में :-
बलात्कार एक अपराध है,जिसका जीवित लोगों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ता है; इसे "एक दुःस्वप्न जैसा और मन का आघाती प्रभाव " के रूप में वर्णित किया गया है; झटके में अवसाद,डर,अपराध-जटिल,आत्मघाती कार्रवाई,यौन उत्पीड़न आदि शामिल हैं!एक विचार है, "आधा मानव जाति" समाज में  महिलायें है ; और महिलाओं की दयनीय स्थिति का जिक्र करते हुए श्री जस्टिस एस अहमद ने कहा कि "दुर्भाग्य से, हमारे देश में एक महिला एक वर्ग या समाज के समूह से संबंधित है जो कई सामाजिक बाधाओं के कारण बहुत ही वंचित स्थिति में हैं!"महिलाओं को भी जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार है; उनके पास सम्मान और समान नागरिकों के समान व्यवहार करने का अधिकार है!उनके सम्मान और गरिमा को छुआ या उल्लंघन नहीं किया जा सकता है!उनके पास एक सम्माननीय और शांतिपूर्ण जीवन का नेतृत्व करने का अधिकार है!बलात्कार मूलभूत मानवाधिकारों के खिलाफ एक अपराध है;और पीड़ित के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन
भी करता है,अनुच्छेद 21 में निहित जीवन का अधिकार के अनुसार!

हर बार पुरुष ही नहीं ,जैसा कि हर सिक्के
का दो पक्ष है, इस मामले में भी दो पक्ष हैं कई बार लड़कियां भी एक लड़के के जीवन को बर्बाद करने के लिए नकली शिकायतें करती हैं, कभी-कभी लड़की के माता-पिता उसे लड़के के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए मजबूर करते हैं, क्योंकि कानून में लड़की के प्रति बहुत सहानुभूति दिखाती है!अभियुक्त कुछ भी नहीं छोड़ा जाता है, जब शिकायत की जाती है, तो उसका जीवन बर्बाद हो जाता है, इस तथ्य के बावजूद कि वह दोषी साबित हुआ या नहीं। इसलिए, मेरे विचारों से दोनों पक्षों को बराबर समझदारी रखना चाहिए पने आप से कानून के नियम अर्थात् "कानून सावधानी के लिए है!"

बलात्कार क्या हो सकता है:-
बलात्कार का अर्थ है
सहमति के बिना एक महिला के साथ किए गया एक गैरकानूनी संभोग (भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 375)!कानून के तहत बलात्कार को परिभाषित किया जाता है विशेषकर और कानून बलात्कार के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नियम लागू करता है। लैंगिक अपराध अधिनियम 2003 के तहत, जो अप्रैल 2004 में लागू हुआ इंग्लैंड और वेल्स में !बलात्कार को गैर-सहमति के बिना संभोग से समन्धित बातो को लेकर परिभाषित किया गया था ! बहुत से अधिनियम और परिवर्तनों में, बलात्कार को अधिकतम आयु कारावास की और अधिकतम सजा के साथ दंडनीय भी बनाया गया! यद्यपि कोई भी किसी को यौन संबंध रखने के लिए मजबूर करता है, उसपर कानून के तहत बलात्कार के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है!अगर वह किसी व्यक्ति को बलात्कार करने में मदद करता है तो भी उसपर अपराध के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है! किसी महिला को उसकी सहमति के बिना यौन गतिविधियों में शामिल करने के लिए उकसाने पर भी उसपर मुकदमा चलाया जा सकता है, एक अपराध जिसके लिए अधिकतम मौत की सजा देना भी शायद कम ही है!

"बलात्कार" में शामिल कुछ संकेत यदि कोई किसी के साथ ऐसा कुछ करता हैं तो निम्नलिखित कुछ परिस्थितियों में से हो सकता है जो यहां लिखा हुआ है: -

1. उसकी इच्छा के खिलाफ!
2. अवैध-गैरकानूनी संभोग सहमति के बिना!
3. उसकी सहमति के साथ, जब उसकी सहमति उस व्यक्ति या किसी ऐसे व्यक्ति को देकर प्राप्त की गई हो जिस में वह मृत्यु या चोट के भय में ऐसा समंध रखती है!
4. उसकी सहमति के साथ, जब आदमी जानता है कि वह उसका पति नहीं है,और उसकी सहमति दी जाती है,क्योंकि वह वैध तरीके अपनाकर या धोखे से समंध रखता है!
5. उसकी सहमति के साथ, जब, ऐसी सहमति देने के समय 
व्यक्ति मन या नशे की अस्वस्थता या जबरदस्ती या व्यक्तिगत रूप से या किसी अन्य के द्वारा किसी भी बदतर या हानिकारक पदार्थ के माध्यम से वह प्रकृति और उसके परिणामों को समझने में असमर्थ हैं ,जिसको वह सहमति देता है!
6. उसकी सहमति के साथ या उसके बिना, जब वह सोलह साल की उम्र के अंतर्गत है।

7.शारीरिक तरीके से कोई आपत्तिजनक इशारा या भद्दा व्यहार या टिप्पड़ी भी इसमें आता है !
Pic-Rape case
नियम का अनदेखा दुरूपपयोग:-अपराधी की सजा, जो आम तौर पर एक से दस वर्ष तक होती है, जहां औसत से अधिक अपराधी तीन से चार साल तक कठोर कारावास के साथ बहुत ही छोटे जुर्माना के साथ भाग लेते हैं;और कुछ मामलों में, जहां अभियुक्त संसाधनपूर्ण या प्रभावशाली है- यहां तक ​​कि भारी मात्रा में धनराशि देकर बचाव कर सकते हैं!अदालतों को इस तथ्य को समझना होगा कि ये बढ़ते क्रूर अपराधियों - जो कभी-कभी अपने पीड़ितों को मारते हैं और यातनाएं भी देते हैं - जो छोटे बच्चों को भी शामिल करते हैं!कारावास के इस तरह के छोटे से अवधी सजा के प्रावधान या भ्रस्टाचार क्रियाकलाप से विचलित नहीं होते या भयभीत नहीं होते हैं! इसलिए न्याय और समाज के सर्वोत्तम हित में इन अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा दी जानी चाहिए।कानून बनी हुई है लेकिन पीड़ितों की संख्या (नाबालिग सहित) असहाय महिलाओं की आत्मा को नष्ट करने में वृद्धि जारी है।यौन उत्पीड़न के माध्यम से बहुत ही अमानवीय बर्ताव किया जाता है,यह एक 'हिंसा का कार्य है !

दुरुपयोग के कारण को समझते हुए 1983 में बलात्कार के मौजूदा कानूनों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव लाए गए हैं!क्योंकि बढ़ती जनमत के जवाब में और अधिक कड़े विरोधी बलात्कार कानूनों की मांग की गई है! यह धारा 376 आईपीसी में संशोधन करता है,और बलात्कार की सजा को बढ़ाता है जिसमें पुलिस अधिकारियों या जेल के कर्मचारियों, रिमांड होम या कानून द्वारा स्थापित हिरासत के अन्य स्थानों के लिए न्यूनतम 10 साल की कारावास की बढ़ती सजा भी प्रदान करती है!इस अधिनियम में एक नया धारा 114-ए आईईए शामिल है,जो
अवैध-गैरकानूनी बलात्कार,सामूहिक घरेलु हिंसा जैसे बलात्कार के मामले,महिलाओं पर बलात्कार और अभर्द्र व्यवहार को कम से कम आंशिक रूप से ही सही ऐसे दुष्कारी प्रभाव के कारण को खत्म करने में दाइत्वपूर्ण साबित होगा!

बलात्कार और बलात्कारियों के कुघाती घटनाओ को लेकर गंभीर और निश्चित सजा, कुछ निवारक नियम होने चाहिए सामाजिक तरीके से,एक मजबूत सामाजिक कठोर प्रतिक्रिया का गठन होना चाहिए!लंबे सज़ा कारावास के समन्धित नियमो में कुछ व्यवहार-प्रतिवर्तन में कठोरता से बदलाव होना चाहिए!बढ़ते अपराध और अपराधियों के लिए मौत की सज़ा की वकालत सामाजिक हीत को देखते हुए होनी चाहिए जो बलात्कार करते हैं,क्योंकि यह हत्या के मुकाबले ज्यादा दुष्प्रभावी अपराध है,और इसके बहुत ही गहरा सदमा,सामाजिक अस्तर का प्रभाव पड़ता है,लोगो को यहां कहे एक परिवार को जीते जी ही मार देता है!मेरा यही विचार है,हम सबको ऐसी जानकारियों से अवगत रहना चाहिए और दुसरो को भी जागरूक करना चाहिए ,हमारी जानकारी ही हमारा सुरक्षा है!
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