Tuesday, 19 May 2020

माँ की सीख

Posted by मंगलज्योति at May 19, 2020 0 Comments
माँ की सीख
माँ बाँटती बेटी को,जो उसके अनुभव का हिस्सा हुआ, 
नजरंदाज बेटी ना करे,मानकर कि रोजाना का किस्सा हुआ |

बहु बनकर बेटियों को,संभालना होता है एक दिन घर, 
उसे सीखना जरूरी है,अच्छा नही लगता घर बिखरा हुआ |

माँ की सीख के मोती को, बेटी ने जितनी शिद्दत से बटोरा, 
गमों से होकर महफूज, उसके घर खुशियों का फेरा हुआ |

बेटियों का हुनर और जायका, बेहतरीन होता जाता है, 
वो माँ के तजुर्बी हाथों से, जितना होता है तराशा हुआ |

बाधाओं के काँटों के मध्य, होता सहिष्णुता के फूल खिलाना, 
रास नही आता परिवार में, चेहरा गुस्से में तमतमाया हुआ |

महज चिंतन को बुनने से, ख्वाब साकार नही हुआ करते ,
पुरा होगा स्वप्न बेटी का, जो अध्ययन से तुफान लाया हुआ |  

माँ की सौच को मान पिछड़ेपन निशानी, ना कर मनमानी, 
तुम्हे ना सुनना पड़े ताना, कुछ भी नही इसे सिखाया हुआ |

नर्सरी के नवांकुर पादप से, होते है हर बेटी के हालात,
शोभित नही करती उस जमीं कों,जहाँ इसे लगाया हुआ |

सामंजस्यता की खाद और विनम्रता की सिंचाई जरूरी है, 
तभी मुर्झाने से पहले बेटी का, वातावरण में ढलना हुआ |
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        सीमा लोहिया 
      झुंझूनू (राजस्थान) 

Sunday, 17 May 2020

वही तो असली प्रकृति

Posted by मंगलज्योति at May 17, 2020 0 Comments
वही तो असली प्रकृति
जहाँ जाने के बाद वापस आने का मन ना करे
जितना भी घूम लो वहाँ पर कभी मन ना भरे
हरियाली, व स्वच्छ हवा भरमार रहती है जहाँ
सच में वही तो असली प्रकृति कहलाती है ।

जहाँ पर चलती गाड़ियों की शोर नही गूंजती
जिस जगह की हवा कभी प्रदूषित नही रहती
सारे जानवरों की आवाजें सदा गूंजती है जहाँ
सच में वही तो असली प्रकृति कहलाती है ।

जहाँ नदियों व झड़नों का पानी पिया जाता है
जहाँ जानवरों के बच्चों के साथ खेला जाता है
बिना डर के जानवर विचरण करते हैं जहाँ
सच में वही तो असली प्रकृति कहलाती है ।

पहाड़ जहाँ सदा शोभा बढ़ाते हैं धरती की
नदियाँ जहाँ सदा शीतल करती हैं मिट्टी को
वातावरण अपने आप में संतुलित रहता है जहाँ
सच में वही तो असली प्रकृति कहलाती है ।
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सौरभ कुमार ठाकुर (बालकवि एवं लेखक)
         मुजफ्फरपुर, बिहार

Monday, 4 May 2020

समाज नारी सशक्तिकरण

Posted by मंगलज्योति at May 04, 2020 0 Comments
समाज नारी सशक्तिकरण
अगर आप छोटी बच्ची हो तब रंगीन झरने सी चंचल रहो..
अगर आप लड़की हो तो तेज दिमाग रखो..
अगर आप स्त्री हो तब आत्मविश्वास सभर एक अदा ओर छटा रखो..
ओर जब आप उम्रदराज़ महिला हो तब अपने वजूद में एक उत्कृष्ट अंदाज़ रखो..!
नारी जीवन का हर पड़ाव गरिमामय ओर खुमारी से भरपूर होना चाहिए, स्त्री विमर्श में उठती हर कलम को अब तोड़ना है, जब हम बोल रहे है कि हम 21 वी सदी की नारी है तब हमारे हर अंदाज़ हर पहलू से परिवर्तन छलकना चाहिए अबला, बेचारी, लाचार जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने वालों को मुँह तोड़ जवाब देना है, हर क्षेत्र में परचम लहराना है।

अपने आस-पास उपेक्षित ओर अनमनी हर लड़की हर स्त्री को कह दो अपना हक छीनना होगा, आज भी समाज में सम्मान को तरसती कुछ स्त्रियाँ है हर लेवल पर गरीब से लेकर उच्च मध्यम परिवार में ओर हाई सोसायटी तक कहीं ना कहीं लड़कीयाँ ओर स्त्रियाँ किसी ना किसी के हाथों प्रताड़ित होती ही रहती है पर अब सीमा लाँघ दो।
हर अदा फ़बती है तुम पर कह दो ज़माने से मेरे कुछ अंदाज साफ़ परिणाम है तुम्हारी तीखी प्रतिक्रिया के, अगर आपको मेरा अंदाज़ पसंद नहीं तो आग लगा दो खुद की सोच को क्यूँकि मेरा अंदाज़ मेरे तेज़ दिमाग ओर ज्ञान की पहचान है।

लड़की ओर औरत की सुंदरता फ़ेशियल की मोहताज नहीं पारदर्शी रूह ओर बुद्धिमत्ता उसकी सुंदरता में चार चाँद लगा देती है, काबिल ओर सक्षम है आज की नारी अपने पैरों पर खड़ी होकर हर मोर्चे पर एक धुँआधार योद्धा साबित होने का दम रखती है, वो पल कलात्मक होते है जब एक कामयाब औरत बिना किसी दिखावे के अपनी कामयाबी पर इतराती आगे बढ़ रही होती है।

ए लड़की तुझे क्या कहूँ तू वो पौधा है जिस आँगन बोई जाए उस घर में पले वनराई ओर हरियाली, तू सूरज है सबको देना बंद कर कोई तुम्हारी तरक्की की रोशनी को सहारा देने नहीं आएगा, तुझे अपना रास्ता खुद तराशना है अपनी ऊँचाई के मायने तय करो महान लक्ष्य पर ध्यान दो अपनी काबिलियत पर भरोसा रखो ओर आगे बढ़ो।
तराशे हुए हीरे की कमनीय धार सी ओर मोती की चमकती परत सी स्त्री बनों, हर मर्द की वो दुआ बन जाओ जब सिक्का उछालते समय वो आसमान की तरफ़ देखकर मांगता है।

अब वक्त आ गया है आँखों में बसे सपनो को उड़ान देने का, सिर्फ़ बोलने भर के लिए जो उपमा दी जाती है बेटीयों को काली, चंडी, दुर्गा की अब वो उर्जा खुद के अंदर प्रकट करनेका वक्त आ गया है।
हर लड़की सुरक्षित रहे हर स्त्री को उसका हक मिले तभी समाज नारी सशक्तिकरण का पक्षधर कहलाएगा।
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   भावना ठाकर बेंगलोर

Sunday, 19 April 2020

कोरोना वाइरस ना कयाम होने दो यारों

Posted by मंगलज्योति at April 19, 2020 0 Comments
कोरोना वाइरस ना कयाम होने दो यारों
1.अपनी सावधानी और सजगता से ,
कोरोना वाइरस ना कयाम होने दो यारों |
घर से बाहर समूह संगठनों में ,
अब अपने विराम होने दो यारों|

2.कोरोना के डर से विदेशों में भी,
अपना रहे है अब अपनी संस्कृति |
विश्व गुरूत्व धारित देश के, 
लबों पर इब्तिसाम होने दो यारो|

3.हम यम ,नियम,योग करूणा, 
शाकाहार को अपनाने वाले है|
कोरोना के डर से ही सही,
विदेशों में अब दुआ सलाम होने दो यारो|

4.भारत के देवालयों में हर रोज,
भक्त चरणामृत में तुलसी का पान करते है|
इस तुलसी की उपयोगिता को,
विदेशों में भी अब सरेआम होने दो यारो |

5.भारत के मंदिर और घरों में, 
कपूर, धुप ,लोंग, इलायची से पूजन होता है|
मेरे देश की ऐसी संस्कृति का,
विदेशों में प्रसारित हो गुलफाम होने दो यारों|

6. कोरोना लक्षण के उभरते ही 
समय से ही उसकी जाँच करवाओ|
घोषित वैश्विकरण महामारी को ,
फैलने से पहले नाकाम होने दो यारो|

7. सरकारी निर्देशों की पालना में,
कभी कोई कोताही ना की जाये,
सीमा से अधिक फैलीे दहशत से 
देश में ना कोहराम होने दो यारों
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     सीमा लोहिया
   झुंझूनू (राजस्थान)

Monday, 30 March 2020

भारत लोकडाउन

Posted by मंगलज्योति at March 30, 2020 0 Comments
भारत लोकडाउन 
कोरोना वाइरस बड़ा घातक है सुन लो मेरी बात, 
कुछ दिनों के लिए टाल दो तुम अपनी मुलाक़ात |

राजस्थान और भारत सरकार ने किया लोक डाउन, 
तुम्हारी सजगता से जल्द बीत जायेगी हर काली रात |

अपनी राष्ट्रभक्ति दिखाने का तुम्हे ये सुअवसर मिला है,
घर से बाहर क्यों निकलो अदृश्य शत्रु लगाये बैठा घात|

जनसम्पर्क पर कस लो तुम कुछ दिन के लिए  लगाम, 
लाजमी हो तो एक मीटर के दायरे से व्यक्त करो जज्बात |

अगर लक्ष्मण रेखा लांघने की ना करोंगे तुम मनमानी ,
तब ही कर पाओगे अनाहुत दुश्मन पर करारा प्रतिघात |

अदृश्य शत्रु का घर में ही छुपकर निष्फल करो हर वार, 
वरना तुम्हे  अगुवा करके होंगे हमले मानव -गात से गात|

बेहतर होगा मानव कौम का समझाने से समझ जाओं ,
वरना तो सहने होंगे पुलिस प्रशासन के डंडे और लात|
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       रचना -सीमा लोहिया
         झुंझूनू (राजस्थान) 

Tuesday, 10 March 2020

Talk on period

Posted by मंगलज्योति at March 10, 2020 0 Comments
Talk on period

सब नॉर्मल चलता रहता है। अचानक लगता है कि चार-पांच किलो वजन बढ़ गया है ,पूरा शरीर एकदम से फूलने लगता है।भूख नहीं लगती पर अचानक भयानक कुछ भी खाने का मन करने लगता है खासकर फास्टफूड टाईप पेट भर जाता है पर मन नहीं भरता।

मुड स्विंग होते रहते है इतनी चिड़चिड़ाहट होती है कि किसी को भी बेवजह चिल्लाने लगते हैं।मन करता है जी भर कर लड़ लो किसी से। कई बार तो बेमतलब ही रोने लगते हैं।पूरी हड्डियों में इतना दर्द होता है कि लगता है कोई रोलर ही चला कर चला जाये..इतनी बेचैनी कि समझ ही नहीं आता कि गर्मी लग रही है या सर्दी.3-4दिनों तक नींद का अता पता नहीं होता।कभी पिम्पल निकल जाते है तो कभी लगता है कि स्किन में रैशेस हो रहे ...

फिर अचानक ध्यान जाता है कैलेंडर की तरफ ..ओह्ह तो ये दिन शुरू होने वाले है...फिर शुरू होता है दो से तीन दिन का कमर , पेट दर्द ..कमर से नीचे तो लगता है कि जान ही नहीं है और ब्लीडिंग का झंझट। ये समय ही ऐसा होता है कि हर लड़की कोसती है.. भगवान लड़की क्यों बनाया.अगले जन्म में लड़का ही बनाना। पांचवें दिन के बाद लड़की जैसे फिर से नयी हो जाती है।पर पिछले 24-25 दिनों में जो बॉडी रिकवर हुई होती है.. फिर से कमजोर हो जाती है।

फिर भी पाँचवे दिन के बाद लगता है सबकुछ बेहतर है ..अच्छा है..सब खूबसूरत है.....

पीरियड्स का ये फायदा है कि खराब चीजें बॉडी से बाहर चले जाती है और बॉडी नये सेल्स बनाने को फिर से तैयार हो जाती है... एक तरह से हर 28 दिन में लड़कियों की बॉडी कुछ नयी हो जाती है।

पर 25 दिन बाद फिर यही ...हार्मोन चेंजेस..मूड स्विंग..दर्द.. तड़प.. और फिर से सबकुछ नया।फिर भी वो पूरी कोशिश करती है इस पांच दिन को भी अपने 25 दिन की तरह ही प्रोडक्टिव बनाने की।क्योंकि लोगों के हिसाब से पीरियड्स बीमारी तो नहीं है जो ऑफिस से छुट्टी ली जाय या घर के काम छोड़ दिये जाय।

कहीं जाना होता है,कोई पूजा होती है या कुछ नया प्लान होता है लड़कियां पहले अपना डेट चेक करती हैं ..क्योंकि उसे पता है कि इस वक्त वो चाहकर भी फिजिकली और मेंटली नॉर्मल नहीं रह सकती।

एक नये जीवन का सृजन करने के लिये हर 28 दिन में लड़कियां ये सब झेलती है ..जब अपना शरीर ही भारी लगने लगता है..लड़की होना अभिशाप लगने लगता है... पर यही सब तो उसे उन 9 महीने के लिये तैयार करता है ..उस दिन उसे ये सारे दर्द सारी तकलीफ बेमानी लगती है...जिस दिन उसका फिर से जन्म होता है..एक माँ के रूप में।

सेनेटरी पैड की बहस और 5 दिन की झंझट से कहीं इतर है ये पीरियड..एक लड़की की सम्पूर्णता बसी है इसमें।

नहीं कुछ भी नहीं चाहिए.. ना लाइक ..ना कमेंट... बस इस वक्त में उसे थोड़ा सा केयर और आराम की जरूरत होती है इसका थोड़ा ख्याल रखियेगा,अगली बार कोई लड़की आपके सामने मेडिकल में पैड लेने जाएं तो मुंह दबाकर मत हँसियेगा। उसके जाने के बाद उसे देखकर कमेंन्ट मत करियेगा.क्योंकि यदि आपकी माँ को पीरियड्स नहीं आते तो आप पैदा ही नहीं होते...

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 नेहा नन्दिता मिश्रा
रायपुर -छत्तीसगढ़ 

Sunday, 8 March 2020

ऋदि सिद्धि है नारी

Posted by मंगलज्योति at March 08, 2020 0 Comments
ऋदि - सिद्धि है नारी
दुर्गा, काली ,चामुण्डा,लक्ष्मी,चण्डी,
 सरस्वती, ऋदि - सिद्धि है नारी !

तु स्वयं में समाती उन हर रूपों को, 
जितने सुने है देवी के रूप अवतारी !

नर के वर्चस्व वाले क्षेत्रों में पकड़ बना, 
मनोबल से वो अपने कभी नही हारी !

वो घर कितना सौभाग्यशाली होता है,
जहाँ गुँजी तेरे बाल रूप की किलकारी !


माँ,पत्नी, पुत्री, बहन हो या अन्य रिश्ता, 
तुमने हर रूप में नर की जिदंगी संवारी !

तु सहनशीलता में मिसाल है पृथ्वी सी,
गौतम की अहिल्या या जनक दुलारी !

तुझ से ईश्वर को अर्द्धनारीश्वर कहा गया,
तुझ बिन सृष्टि अकल्पनीय और अधुरी !

निष्ठा में अनुसुया,तारा,राधा,सावित्री है, 
लौटा लाई यमलोक से मौत तुझसे हारी !

राधेकृष्ण, सीताराम, उमापति नाम में समझो, 
देव से पहले देवी के उच्चारण की दुनियादारी !

तु ममता, वात्सल्य जैसे गुणों की है यशोदा, 
लुटाकर प्यार अपना बलैया और नजर उतारी !

सीमा लांघने पर छिना तुझसे जीवन का हक, 
महिषासुर मर्द्धनी बन तुम्हे मौत के घाट उतारी !
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स्वरचित मौलिक रचना -सीमा लोहिया 
झुंझूनू (राजस्थान)

Sunday, 1 March 2020

देहविक्रय एक कलंक

Posted by मंगलज्योति at March 01, 2020 0 Comments
देहविक्रय एक कलंक
आज एक विषय पर बहुत चिंतन किया समाज का सबसे बड़ा कलंक है लड़कीयों ओर स्त्रियों का देह विक्रय उस अंधेरे जीवन के बारे में सोचते ही कलेजा मुँह को आ जाता हे। देश के सारे अहं मुद्दों के बीच एक अनछुआ मुद्दा है वेश्यावृत्ति, बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ के स्लोगन लिख तो लेते है हम पर उस दिशा में ठोस कदम कितने उठाए जाते है।

जीवन में हर समस्या के दो समाधान होते है अच्छी राह चुनना ओर दलदल में धसना, स्त्रीयाँ या लड़कीयाँ देह विक्रय का रास्ता खुद चुनती है, या धकेल दिया जाता है ? ये सोचनिय मुद्दा है आख़िर क्यूँ हर बड़े शहर में ये धंधा दीमक की तरह फैल रहा है।

देश का सबसे बड़ा रेडलाइट एरिया कोलकाता का सोनागाची इलाका है, दूसरे नंबर पर मुंबई का कमाटीपुरा, फिर दिल्‍ली का जीबी रोड, आगरा का कश्‍मीरी मार्केट, ग्‍वालियर का रेशमपुरा, पुणे का बुधवर पेट हैं इन स्‍थानों पर लाखों लड़कियां हर रोज बिस्‍तर पर परोसी जाती हैं।

वेश्यावृत्ति को अपनाने के मूलभूत कारण कुछ इस प्रकार माने जाते हैं जिन कारण से ये स्त्रियां वेश्यावृत्ति का रास्त चुन लेती हैं उसमें सबसे बड़ा आर्थिक कारण होता है, अनेक स्त्रियां अपनी एवं आश्रितों की भूख की ज्वाला शांत करने के लिए विवश होकर इस वृत्ति को अपनाती हैं। जीविकोपार्जन के अन्य साधनों के अभाव तथा अन्य कार्यों के अत्यंत श्रम साध्य एवं अल्प वैतनिक होने के कारण वेश्यावृत्ति की ओर आकर्षित होती है।

या बहुत बार हम सुनते है की परिवार के ही किसी सदस्य ने बेच दिया हो या तो एसी मजबूरी आन पड़ी हो की इस गंदगी भरे रास्ते को चुनने के सिवाय कोई चारा ही ना हो एसी स्थिति में चलो मान लेते है की इस काम को अपना लिया हो, पर क्या ओर को राह नहीं होती ? ओर कोई काम नहीं होते जो सीधे कदम कोठे की दहलीज़ पर रुक जाते है।

इस व्यवसाय में हिंसा भी चरम पर होती है दलालों द्वारा या एसे कोठे को चलाने वाली मुखिया के द्वारा पीटा जाता है, दमन किया जाता है ओर मानसिक रुप से अपाहिज लड़कीयाँ डर के मारे विद्रोह नहीं करती ओर अपना लेती है नर्कागार को।

पर समाज में काम की कोई कमी नहीं आप अपने हुनर ओर हैसियत के मुताबिक जो काम करना चाहो थोड़ी मसक्कत के बाद मिल ही जाएगा तो क्यूँ कोई जानबूझकर उस गंदगी को अपनाता है ये सवाल है।
इस पेशे में अच्छे घर की लड़कीयों को जाते हुए देखा है महज शानो शौकत की ज़िंदगी जीने के ख़्वाब पूरे करने के लिए  शायद पैसा कमाने का ये बहुत ही आसान ज़रिया होता है, काल गर्ल को सुना है एक रात के हज़ारों रुपयों में तोलने वालों की कमी नहीं।

माना की पैसा सबकुछ है पर गुज़र बसर करने के लिए इंसान को चाहिए कितने ? ये आजीविका नहीं शौक़ पालने के फ़ितूर हुए।

तो दूसरी ओर देखा जाए तो गरीबी और निराशा, वेश्‍यावृत्ति को और भी हवा देती है। लड़कीयों  के शोषण और वेश्‍यावृत्ति का “सीधा-सीधा संबंध, टूटते परिवारों, भुखमरी और निराशा भी हो सकता है उनको लगता है की ज़िंदा रहने के लिए उनके पास वेश्‍यावृत्ति के अलावा कोई चारा नहीं।

क्यूँ सरकार, कोई संस्था, या आम इंसान इस विकट समस्या के बारे में नहीं सोचता  देश के हर छोटे बड़े मुद्दों पर इन सबकी बाज नज़र होती है पर ये मुद्दा तो ज्वलन्त है कोई तो आगे आए इसका समाधान ढूँढने, कितनी मासूम इस नर्कागार में झुलस रही होगी, कोई पाक साफ़ दुपट्टा उनके लिए भी बना है क्या ? जो इनके जलते बदन के ज़ख्मो पर नमी की परत बिछाए।

वैसे इस आग को बुझाना नामुमकिन है इतनी बड़ी आबादी को चपेट में ले रखा है की कोई शुरु करें तो कहाँ से शुरू करें फिर भी एक कोशिश तो होनी चाहिए, मेरे खयाल से इस पेशे में लगीं महिलाओं को व्यवसायिक प्रशिक्षण देना चाहिए, और उनके लिए रोजगार के अवसर पैदा किए जाने चाहिए तो शायद जो मजबूरी में इस दलदल में फंसी हो उसे इज्जत भरी ज़िंदगी जीने का मौका मिलें।
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    भावना जीतेन ठाकर
    चूडासान्द्रा, सरजापुर
     बेंगलुरु  - कर्नाटक 

नये जमाने की होली

Posted by मंगलज्योति at March 01, 2020 0 Comments
नये जमाने की होली
अब होली मनाने के पुराने तरीके भूलने लगे हैं  !
चहूँओर नये जमाने के नये रिवाज छाने लगे हैं !

कहाँ गया पहले वाला स्नेह-सोहाद्र -भाईचारा ,
लगता ज्यों त्याग उसे राग नया अलापने लगे हैं !

पहलें सा त्यौहार का उत्साह नजर आता नही, 
लगता खुशियों के अंदाज नये तलाशने लगे है!

बेजान और फीकी सी लगने लगी मुख की हँसी ,
मुखोटे से चेहरे भाव भी अब नकली सजाने लगे हैं !

कहीं नजर नही आती है पहले वाली एकसूत्रता, 
मतैक्यता अभाव में होली भी कई जलाने लगे हैं !

क्यों हो गई पत्नोन्मुखी सी पुरातन अखंड परम्परा, 
अब संभालते नही बल्कि एक दूजे को गिराने लगे हैं !

छल,दंभ, पाखण्ड का छाया है ये कैसा बोलबाला ?
इसे आचरण में उतार क्यों व्यापार इसका बढाने लगे हैं !

क्यों होने लगा है ऐसा अभाव परोपकारिता का ?
स्वार्थपरायण लोलुप जन पाप क्यों कमाने लगे हैं ? 

येन -केन प्रकारेण  सबका बस मतलब सिद्ध हो, 
फिर जैसे भी हो बाधा को राह से लुढकाने लगे है !

प्रयासरत रहते हैं सुविधाभोगिता "सीमा" पाने में, 
अपनी नापसंदगी से तो पुरजोर पीछा छुटाने लगे हैं !

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स्वरचित मौलिक रचना --सीमा लोहिया 
झुंझुनू (राजस्थान)  

Monday, 6 January 2020

उसके चेहरे का गुलाबी हो जाना

Posted by मंगलज्योति at January 06, 2020 0 Comments
उसके चेहरे का गुलाबी हो जाना
कोई कहता है सात दिन और सात रात का पैकेज मतलब प्रेम??
मैं कहती हूं चांदनी रात, एक झूला और हाथ में उसका हाथ मतलब प्रेम।

कोई कहता है पेरिस की खूबसूरत शाम मतलब प्रेम??
मैं कहती हूँ की जब आप उसको अचानक कोई तोहफा 
दो और उसकी आंखों में जो चमक आये वो प्रेम।

कोई कहता है कश्मीर के बर्फीले पहाड़ो में घूमना मतलब प्रेम??
मैं कहती हूं चुपके से उसके बालों में गजरा लगा दो वो प्रेम।।

कोई कहता है स्टाइलिश कपड़े पहनकर अपने साथी के 
साथ घूमना मतलब प्रेम ??
मैं कहती हूँ त्योहारों के दिन दुल्हन की तरह सजी हुई अपनी 
जाना को बिना पलके झुकाएं देखना वो प्रेम।

कोई कहता है उसको गुलाब का फूल देना मतलब प्रेम ??
मैं कहती हूँ सबके सामने एक पल चुरा कर उसको कहना 
"बहुत खूबसूरत लग रही हो जाना " 
और ये बात सुन कर उसके चेहरे का गुलाबी हो जाना वो प्रेम।

कौन कहता है कि उसके सौदंर्य पर कविता लिखना मतलब प्रेम ??
मैं कहती हूँ कि जब वो आपसे दूर हो तब सारी कविताओं में उसको देखना वो प्रेम।

कौन कहता है कि लाज शर्म का परदा खोल कर एक दूसरे को जान पहचान लेना मतलब प्रेम ??
मैं कहती हूं कि सालों बाद भी कही किसी कविता में सिर्फ उसका नाम पढ़ कर शर्मा जाना वो प्रेम।
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       अमी व्यास 
अहमदाबाद , इंडिया 

Saturday, 14 December 2019

तुलसी जी का विवाह

Posted by मंगलज्योति at December 14, 2019 0 Comments
तुलसी जी का विवाह
तुलसी(पौधा) पूर्व जन्म मे एक लड़की थी जिस का नाम वृंदा था, राक्षस कुल में उसका जन्म हुआ था बचपन से ही भगवान विष्णु की भक्त थी.बड़े ही प्रेम से भगवान की सेवा, पूजा किया करती थी.जब वह बड़ी हुई तो उनका विवाह राक्षस कुल में दानव राज जलंधर से हो गया। जलंधर समुद्र से उत्पन्न हुआ था.

वृंदा बड़ी ही पतिव्रता स्त्री थी सदा अपने पति की सेवा किया करती थी.

एक बार देवताओ और दानवों में युद्ध हुआ जब जलंधर युद्ध पर जाने लगे तो वृंदा ने कहा –

स्वामी आप युद्ध पर जा रहे है आप जब तक युद्ध में रहेगे में पूजा में बैठ कर आपकी जीत के लिये अनुष्ठान करुगी,और जब तक आप वापस नहीं आ जाते, मैं अपना संकल्प

नही छोडूगी। जलंधर तो युद्ध में चले गये,और वृंदा व्रत का संकल्प लेकर पूजा में बैठ गयी, उनके व्रत के प्रभाव से देवता भी जलंधर को ना जीत सके, सारे देवता जब हारने लगे तो विष्णु जी के पास गये।
सबने भगवान से प्रार्थना की तो भगवान कहने लगे कि – वृंदा मेरी परम भक्त है में उसके साथ छल नहीं कर सकता ।

फिर देवता बोले – भगवान दूसरा कोई उपाय भी तो नहीं है अब आप ही हमारी मदद कर सकते है।
भगवान ने जलंधर का ही रूप रखा और वृंदा के महल में पँहुच गये जैसे

ही वृंदा ने अपने पति को देखा, वे तुरंत पूजा मे से उठ गई और उनके चरणों को छू लिए,जैसे ही उनका संकल्प टूटा, युद्ध में देवताओ ने जलंधर को मार दिया और उसका सिर काट कर अलग कर दिया,उनका सिर वृंदा के महल में गिरा जब वृंदा ने देखा कि मेरे पति का सिर तो कटा पडा है तो फिर ये जो मेरे सामने खड़े है ये कौन है?
उन्होंने पूँछा – आप कौन हो जिसका स्पर्श मैने किया, तब भगवान अपने रूप में आ गये पर वे कुछ ना बोल सके,वृंदा सारी बात समझ गई, उन्होंने भगवान को श्राप दे दिया आप पत्थर के हो जाओ, और भगवान तुंरत पत्थर के हो गये।
सभी देवता हाहाकार करने लगे लक्ष्मी जी रोने लगे और प्रार्थना करने लगे यब वृंदा जी ने भगवान को वापस वैसा ही कर दिया और अपने पति का सिर लेकर वे

सती हो गयी।
उनकी राख से एक पौधा निकला तब

भगवान विष्णु जी ने कहा –आज से

इनका नाम तुलसी है, और मेरा एक रूप इस पत्थर के रूप में रहेगा जिसे शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जायेगा और में

बिना तुलसी जी के भोग

स्वीकार नहीं करुगा। तब से तुलसी जी कि पूजा सभी करने लगे। और तुलसी जी का विवाह शालिग्राम जी के साथ कार्तिक मास में

किया जाता है.देव-उठावनी एकादशी के दिन इसे तुलसी विवाह के रूप में मनाया जाता है !
🙏🏼🙏🏼इस कथा को कम से कम दो लोगों को अवश्य सुनाए आप को पुण्य अवश्य मिलेगा।

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मंगलज्योति 

Saturday, 7 December 2019

फिर कैसे मैं प्यार लिखूँगा

Posted by मंगलज्योति at December 07, 2019 0 Comments
रोज काल का ग्रास बन रही आसिफा,
फिर कैसे मैं प्यार लिखूँगा 

फिर कैसे मैं श्रृंगार लिखूँगा ।
देश चल रहा नफरत से ही,
फिर कैसे मैं प्यार लिखूँगा ।

वंचित हैं जो अधिकार से अपने,
उनका मैं अधिकार लिखूँगा ।
दुष्टों को मारा जाता है जिससे,
अब मैं वही हथियार लिखूँगा ।

रोज जवान मर रहे सीमा पर,
कब तक मैं उनकी बली सहूँगा ।
मर रही जनता रोज देश की,
कब तक मैं ये अत्याचार सहूँगा ।

आसिफा,ट्विंकल ना जाने कौन-कौन ?
अब इनकी चित्कार लिखूँगा ।
हाँ, देश चल रहा नफरत से ही
फिर कैसे मैं प्यार लिखूँगा ।

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सौरभ कुमार ठाकुर (बालकवि एवं लेखक)
          मुजफ्फरपुर, बिहार

समाज उत्थान हेतु दान पात्र

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