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मै माहेश्वर ....

" मै माहेश्वर "
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...मै माहेश्वर ...
मै त्रिलोकी त्रिभुवन का
मुझमे रमता जग है सारा
मुझसे चलता जग का कण-कण
मुझमे आता जग है सारा...
ब्रह्मा मेरे अंश कहलाते
विष्णु से है जीवन चलता
मै माहेश्वर इस सृष्टि का
हम तीनो से जग है पलता....
मै हूँ त्रिनेत्र का स्वामी
मेरे जटा मे गंगा रहती
मेरे गले मे विष है जमता
सर्प गले मे हार सजाती.....
भोले-भण्डारी मुझको कहते
मुझसे मोक्ष के द्वार तक आते
शिवरात्री है मेरी महिमा
हर इंसा के भाग्य जगाते....
जो भी मेरा पूजन करता
हर बाधा से मुक्ति पाता
बेलपत्र से खुश होता हूँ
नही फलो का लोभ लुभाता...
सारा जग है मेरा बच्चा
जो भी करता पूजन सच्चा
करता उसका भाग्यउदय मै
सारी उमर है सुख से कटता।
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स्निग्धा रूद्रा
 Hathua, India

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