Sunday, 20 May 2018

देश का किसान मजदूर बेरोज़गार

Posted by मंगलज्योति at May 20, 2018 0 Comments

कानून की भाषा बोलता हुआ अपराधियों का संयुक्त परिवार है।

देश का किसान, मजदूर, बेरोज़गार
   मध्यप्रदेश का एक किसान 45 डिग्री सेल्सियस में 4 दिन से मंडी में अपनी फसल की तुलाई होने का इंतज़ार लाइन में लगकर करता है और अन्तः उसकी मौत हो जाती है। अब मरने से पहले मूलचंद नामक इस किसान ने "हे राम" या "भारत माता की जय" या "मेरा भारत महान" का जयघोष किया था या नहीं, यह अभी तक पता नहीं चल सका है। यह भी संभव हो कि मरते वक्त इसका पेट ख़ाली हो और उसके मुंह से "आलू" "चना" या 'प्याज़" नामक शब्द निकला हो। यह किसको वोट देता था और किसकी भक्ति करता था, यह भी अभी तक पता नहीं चल सका है। अगर पता चल जाता तो कहीं न कहीं से एक ट्यूट ज़रूर आता।

  वैसे भी यह कोई ख़ास ख़बर नहीं है क्योंकि देश "हर हर घर घर" की भक्ति या विरोध में मस्त है, लीन है और व्यस्त है। बड़ा बड़ा विकास हो रहा है, इन फालतू की बातों पर कौन ध्यान दे!

 वैसे भी इस देश का किसान, मजदूर, बेरोज़गार नवयुवक आदि एक कीड़े में परिवर्तित कर दिया गया है, एकदम काफ़्का की कहानी "मेटामोरफॉसिस" की तरह।

 कोई सत्ता के घमंड में चूर है तो कोई छीन गई सत्ता को कैसे भी वापस लाने की जुगाड़ में। कहीं अपनी हवाई उपलब्धियों का हवा-हवाई और आक्रामक प्रचार है तो कहीं उस हवाई फायर का पुरज़ोर हवाई विरोध और कुछ हम आप जैसे भी महात्मा हैं जो फेसबूक पर पोस्ट मात्र डालकर लाइक कमेंट के खेल से अपनी सार्थकता और सामाजिक सरोकरता सिद्ध करने में लगे हैं, बाकी सच में और यथार्थ की धरातल पर समाज को सुंदर, सुलभ और मानवीय मेहनतकश वर्ग के सर्वथा अनुकूल बनाने के लिए कौन क्या कर रहा है, यह तथ्य हम सब जानते हैं - अब उसे माने या ना माने यह अलग बात है। वैसे भी पूंजीपतियों के टुकड़ों पर चलने वाली पार्टियां और पलने वाले नेता क्या ख़ाक सेवा करेगें देश के आवाम की।

 पूरे देश में किसानों की दैनीय स्थिति के बारे में शायद ही कोई अनभिज्ञ होगा। तो साहिबान, लीजिए प्रस्तुत है उस मारे हुए किसान की तस्वीर ताकि आपको दुःख जैसे महसूस कुछ करने में ज़्यादा ज़ोर ना लगाना पड़े। तो आइए हम सब "जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान" कहते हुए दुःखी जैसा कुछ इमोशन क्रिएट करते हैं।

  यह उस किसान की एक फाइल फोटो है। उसकी दर्दनाक मौत (हत्या) की तस्वीरें और मौत का तमाशा देखते लोगों की तस्वीर भी नेट पर उपलब्ध हैं। अगर इस फोटो से सच्ची फिलिंग नहीं आ रही तो कृपया एक  बार उन तस्वीरों का भी अवलोकन करें।

  इस फालतू के स्टेटस को पढ़ने में जो कीमत समय गया उसकी भरपाई हम सब आज आईपील का T20 क्रिकेट मैच देखकर या कर्नाटक पर बहस करके कर संकतें हैं या कुछ नहीं तो मोदी-राहुल ही कर लेते हैं-वक्त कट जाएगा, आराम से।

  जबतक सर्वहारा, मजदूर, किसान एकजुट होकर अपने सच्चे प्रतिनिधित्व को सत्ता के शीर्ष पर काबिज़ नहीं करते, तब तक स्थिति यही होगी। बाकी धोखा का क्या है वो तो हर रंग वाले रंगे सियार घूम ही रहें हैं नेता, बुद्धिजीवी, कलाकार का चोला धारण करके, जिसे धूमिल "कानून की भाषा बोलता हुआ अपराधियों का संयुक्त परिवार कहते हैं।"

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पुंज प्रकाश


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