Wednesday, 28 November 2018

तुम और राजस्थान

Posted by मंगलज्योति at November 28, 2018 0 Comments

तुम और राजस्थान
जैसे-जैसे 
मुझे अच्छा लगने लगा 
तुम्हारा साथ,
मेरे देश की संस्कृति में मुझे तुम नज़र आने लगे
तुम,तुम,
सिर्फ तुम
जैसे
तपते रेगिस्तान में समा जाती हैं 
थोड़ी सी बारिश
और दिखाई नहीं देती
वैसे ही जब मैं मगन होती हूँ 
तेरहताली की खनक में,
तभी अचानक से
तुम जाने कहाँ से समा जाते हो उस खनक में,
उतना ही मुझमें भी।
और तेरहताली ही क्यों?
मुझे राजस्थान के पूरे संगीत में
सुनाई देती हैं
तुम्हारे गीतों की धुनें।
घूमर में 
झूमती हुई आती हैं तुम्हारी 
बेमतलब की ढेर सारी बातें
और कभी 
मूमल के इंतज़ार में 
शामिल होता है मेरा इंतज़ार
वो भी तुम्हारे लिए।
तुम्हें याद करते हुए
कभी याद आती है 
ढोला-मारू की प्रेम कहानी
तभी 
कहीं दूर से सुनाई देती 
सारंगी पर बजती हुई धुन 
"केसरिया बालम आवो नी 
पधारो म्हारे देश"
और तुम चले भी आते हो 
उसी धुन की गूँज के साथ
फिर मेरे ख्यालों में.....
**********************************
Avatar
           अनुगूँज
  जयपुर , राजस्थान 

आप भी अपनी कविता, कहानियां ,लेख अन्य रोचक तथ्य हमसे फेसबुक /ट्विटर ग्रुप में शेयर या
इस Email👉 mangaljyoti05@outlook.com पर भेज सकते हैं !

अपडेट प्राप्त करे

नए लेख के लिए सब्सक्राइब करिये ,हम कभी भी आपका ईमेल पता साझा नहीं करेंगे.

0 comments:

समाज उत्थान हेतु दान पात्र

Subscribe

Archive

Translate

Views

Copyright©2017 All rights reserved मंगलज्योति

back to top