Wednesday, 28 February 2018

आओ करीब आओ......

Posted by मंगलज्योति at February 28, 2018 0 Comments

नश्तर कितने भी चुभाओ
आओ करीब आओ।।

इस झील से जीवन मे
दिल मेरा नही लगता
लाओ तूफ़ान कोई लाओ
आओ करीब आओ।।

इन उजालों से उकता गया हूं
अपनी जुल्फें जरा बिखराओ
थोड़े अंधेरे जरा बसाओ
आओ करीब आओ।।

भटक गया हूं चलते चलते
मुझे कोई राह दिखाओ
दिखाओ नई राह दिखाओ
आओ करीब आओ।।

सारी दुनियां में घूम आया हूँ
सकूं कहीं नही पाया हूँ
मुझको सीने से लगाओ
आओ करीब आओ।।

प्यार के नाम पे फरेबों की
हर शै को देख आया हूँ
मुझको इंसाफ दिलाओ
आओ करीब आओ।।

क्यूँ मैं दुनियां सा ना हो पाया
लाख चाहा नही बदल पाया
थोड़ा मुझको बदल जाओ
आओ करीब आओ।।

आज महससू फिर यूँ होता है
जीवन व्यर्थ में ही खोता है
नई कुछ उम्मीद जगाओ
आओ करीब आओ।।

अच्छा है कि जुदाई मिली
तुम्हे जाना लगा खुदाई मिली
इल्ज़ाम कितने भी लगाओ
आओ करीब आओ।।

सोचता हूँ इस जुदाई से
मिला क्या हमें रुसवाई से
नश्तर कितने भी चुभाओ
आओ करीब आओ।।
***************











प्रदीप सुमनाक्षर
Delhi ,India


आप भी अपनी कविता, कहानियां ,लेख अन्य रोचक तथ्य हमसे फेसबुक /ट्विटर ग्रुप में शेयर या
इस Email👉 mangaljyoti05@outlook.com पर भेज सकते हैं !

अपडेट प्राप्त करे

नए लेख के लिए सब्सक्राइब करिये ,हम कभी भी आपका ईमेल पता साझा नहीं करेंगे.

0 comments:

समाज उत्थान हेतु दान पात्र

Subscribe

Archive

Translate

Views

Copyright©2017 All rights reserved मंगलज्योति

back to top