Wednesday, 7 February 2018

दो लफ्ज़.....

Posted by मंगलज्योति at February 07, 2018 0 Comments

दो लफ्ज़
***********
एे बेवफा किसमत तेरे नाम दो लफ्ज़

ग़मों की भोर है ये,आँसुओं का रेला है!
भरी सड़क पे भी,दिल बहुत अकेला है!!

कहाँ पर आ कर हमें इश्क़ ने छोड़ा है!
कहाँ की बस्ती है और कहाँ का मेला है!!

शहर में बिकने को हर चीज़ सामने लगी है!
मिले कुछ अपने लिये, ऐसा नहीं ठेला है!!

बता ऐ ज़िन्दगी हमें, और क्या करना है!
तुझे निभाते हुये बहुत हमने झेला है!!

हुये मायूस इस क़दर, कि कुछ भाये न !
समझ के बैठ गये,मुक़द्दरों का खेला है!!
************
Karan Bhai
SHAYAR


आप भी अपनी कविता, कहानियां ,लेख अन्य रोचक तथ्य हमसे फेसबुक /ट्विटर ग्रुप में शेयर या
इस Email👉 mangaljyoti05@outlook.com पर भेज सकते हैं !

अपडेट प्राप्त करे

नए लेख के लिए सब्सक्राइब करिये ,हम कभी भी आपका ईमेल पता साझा नहीं करेंगे.

0 comments:

समाज उत्थान हेतु दान पात्र

Subscribe

Archive

Translate

Views

Copyright©2017 All rights reserved मंगलज्योति

back to top