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प्राण तक तज दिए प्रेम के वास्ते....

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हम मिले और मिल कर बिछड़ भी गए,
मन का हर एक आखर रहा अनकहा।
देह का खोखला आवरण शेष है,
ख़ुद का ख़ुद में न कुछ अंश बाक़ी रहा !

नव्य सावन अभी द्वार आया ही था,
आँख के भाद्र संग बह गया पल में वो।
सुर्ख़ कोपल अभी जगमगायी ही थी,
फँस गयी निर्दयी भाग्य के छल में वो।
एक टूटा हृदय हाथ में थामकर ,
कष्ट आहों के संग अश्रुओं में बहा! 
हम मिले ......
MJImage#02
प्राण तक तज दिए प्रेम के वास्ते,
प्रेम का नाम रौशन तो उन ही से है।
प्रेम चूमें सफलता शिखर झूमकर,
भाग्य में ऐसा लिक्खा तो विरलों के है।
इस कथा में वो अपवाद हम ना बने,
किंतु दुःख तो तनिक हमने कम ना सहा!
हम मिले ......

स्वप्न जिनसे थी जीवित चमक आँख की,
जाने क्यों दूजी आँखों में चुभने लगे।
प्राण में घोल देते थे जीवंतता,
ऐसे अभिसार के क्रम भी थमने लगे।
पीर आकाश से भी वृहद हो गयी,
भाव का जब भी संसार नीरव दहा!!
हम मिले .....
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Girijesh Tiwari 
 Gorakhpur,India


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