Friday, 13 April 2018

आइल आन्ही आइल तूफान। अब के पकवे चाउर पीसान ।।

Posted by मंगलज्योति at April 13, 2018 0 Comments


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आइल आन्ही आइल तूफान।
अब के पकवे चाउर पीसान ।।

पाथल इंटा सब भीज गइल।
सब इंट भीज के लीद भइल।
नोकसान देखी के भट्ठा के
भट्ठा मालिक भइलं ऊतान।।
आइल आन्ही आइल तूफान।
अब के पकवे चाउर पीसान।।

कुछ मड़ई मे जा के ढूकल।
देखल जब सांप सांप सूंघल।
कुछ सचहूं ओके काल बूझल।
कुछ के सूखे लागल परान।।
आइल आन्ही आइल तूफान।
अब के पकवे चाउर पीसान।।

धुरी मे सभे नहाय गइल ।
पावडर भर देहीं पोताय गइल।
पुरा चेहरा अस धुरीआइल
सब झारे लागल ऑंख कान।।
आइल आन्ही आइल तूफान।
अब के पकवे चाउर पीसान।।।

दुलहा के हुलिया बिगड़ गइल।
तम्बू कनात सब उखड़ गइल।
जे जहां रहल उहें अकड़ गइल।
सब खतम हो गइल शान बान।।
आइल आन्ही आइल तूफान।
अब के पकवे चाउर पीसान।।

बादल गड़ गड़ गड़के लागल।
बिजली रही रही तड़के लागल।
येगो बवंडर अइसन आइल।
पोखर मे जा के गिरल छान।।
आइल आन्ही आइल तूफान।
अब के पकवे चाउर पीसान।।

MJImage#02
तड़ुवान ताड़ पर अटक गइल।
थुकवा तारू मे सटक गइल।
लबनी न गिरे न देहं गिरे
होखे लागल ई इम्तहान।।
आइल आन्ही आइल तूफान।
अब के पकवे चाउर पीसान।।

कुछ बस टीसन के राह धइल।
तब तक ओलो बिकराल भइल।
येगो बस आइल त घुसे खातिर
हो गइल बड़ा भेड़ीया धसान।
आइल आन्ही आइल तूफान।
अब के पकवे चाउर पीसान।।

खरीहानो के दुग॔ती भइल।
गेहूं मे भी कुछ नमी भइल।
ओकरे पहिले जो चलल आन्ही
भूसा जा के धइलस सिवान।
आइल आन्ही आइल तूफान।
अब के पकवे चाउर पीसान।।

ठंडी से कुछ कांपे लागल ।
दमहा जे रहे हांफे लागल।
कुछ मनई मन ही मन में
चालीसा हनु बांचे लागल।
आन्ही मे घेरइलं कई बेर।
तब ई कविता लिखलं "खेतान"।।

आइल आन्ही आइल तूफान।
अब के पकवे चाउर पीसान।।

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Jagdish Khetan
Kapataganj, India

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