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त्यौहार रक्षाबंधन पर कुछ प्रचलित कथाएं

रक्षाबंधन
रक्षाबंधन भाई बहन के अटूट बंधन का त्यौहार हैं! यह बहुत ही आदर और सम्मान , प्यार का त्यौहार हैं ! इस प्रचलित त्यौहार पर बहुत सी कथाएं हैं! आज हम आप सबको कुछ ऐसे ही बातो को बताने वाले हैं!

राजा बली
राजा बली के बारे में तो सभी जानते हैं , बली बहुत ही दानी और भगवान् विष्णु के अनन्य भक्त थे! माना जाता हैं उन्होंने एक बार यज्ञ का आयोजन करवाया! इस यज्ञ में भगवान् विष्णु उनकी परीक्षा लेने के लिए ब्राह्मण का वेश बनाकर आये और दान में तीन पग भुमि मांगे! बली ख़ुशी-ख़ुशी दान देने को तैयार हुए पर विष्णु जी ने दो पग में ही सारा आकाश पृथ्वी नाप दिया! अंत में बली को कुछ समझ ना आया तो उन्होंने अपना मस्तक भगवान् के चरणों में समर्पित कर दिया! और भगवान् विष्णु से विनती किये की आप मेरे साथ पाताल लोक में चलकर रहिये ! इस बात से देवी लक्ष्मी बहुत चिंतित हुयी और उन्होंने भी एक लीला रची! एक गरीब महिला बनकर देवी लक्ष्मी राजा बली के पास गयी! उन्होंने एक प्रतिज्ञा स्वरुप एक बंधन बांधा राजा बली को और उपहार स्वरुप कुछ माँगा तो राजा बली बोले मेरे पास तो कुछ नहीं है देने के लिए! देवी लक्ष्मी अपने देवी रूप में आ गयी और उन्होंने पुनः उनसे अपने भगवान विष्णु को मांग लिया! राजा बली ने ख़ुशी-ख़ुशी  भगवान् विष्णु को सौप दिया! जाते जाते भगवान् विष्णु ने राजा बली को वरदान दिया की हर साल के चार महीने वो पाताल में ही रहेंगे! यह चार महीना चातुर्मास के रूप में माना जाता हैं! जो देवशयनी एकादशी से लेकर देवउठानी एकादशी तक होता है! और यह दिन रक्षाबंधन के त्यौहार में मनाया जाने लगा!

भगवान श्री कृष्ण
एक कथा यह भी हैं कि जब युधिष्ठिर इन्द्रप्रस्ठ में राजसूय यज्ञ कर रहे थे उस समय शिशुपाल भी सभा में मौजूद था! उसने भगवान श्री कृष्ण का अपमान किया तो श्री कृष्ण अपने चक्र सुदर्शन से शिशुपाल का गला काटे थे! चक्र की वजह से भगवान की उंगली कट गयी जिसपर द्रौपदी ने अपने आँचल का पल्लू फाड़कर बांधा था! तब श्री कृष्ण ने कहा था कि मैं इस एक-एक धागे का वचन निभाउंगा! जब कौरव ने बीच सभा में द्रौपदी का चीरहरण करना चाहा तो उस समय भगवान ने उनकी मदद की! कहते हैं जिस दिन द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की कलाई में साड़ी का पल्लू बांधा था वह श्रावण पूर्णिमा की दिन था।




भविष्य पुराण में एक कथा यह भी है कि वृत्रासुर से युद्ध में देवराज इंद्र की रक्षा के लिए इंद्राणी शची ने अपने तपोबल से एक रक्षासूत्र तैयार किया और श्रावण पूर्णिमा के दिन इंद्र की कलाई में बांध दी। इस रक्षासूत्र ने देवराज की रक्षा की और वह युद्ध में विजयी हुए। यह घटना भी सतयुग में हुई थी!

राजा पुरु
एक कहानी बहुत प्रचलित हैं रक्षाबंधन पर ! जब सिकंदर पूरे विश्व पर विजय पाने निकला था तो वह भारत भी आया ! राजा पुरु बहुत बलशाली और प्रभावशाली राजा थे ! सिकंदर की पत्नी को रक्षाबंधन के बारे में पता था वह राजा के पास आयी और सिकंदर की जान बख्सने के लिए राजा को राखी बाँधी थी ! युद्ध के दौरान राजा ने इस धर्म का पालन करते बंदी बना लिए गए थे ! पर जब यह सारी बात सिकंदर को पता चला तो उसने भी राजा का सम्मान करते हुए उन्हें आजाद कर दिया ! यह हैं हमारी भारतीय संस्कृति , सभय्ता !

चंद्रशेखर आजाद
एक प्रसंग आजादी की लड़ाई लड़े चंद्रशेखर आजाद जी की हैं ! फिरंगियों से बचने के लिए शरण लेने हेतु आज़ाद एक तूफानी रात को एक घर में जा पहुंचे जहां एक विधवा अपनी बेटी के साथ रहती थी। हट्टे-कट्टे आज़ाद को डाकू समझ कर पहले तो वृद्धा ने शरण देने से इनकार कर दिया लेकिन जब आज़ाद ने अपना परिचय दिया तो उसने उन्हें ससम्मान अपने घर में शरण दे दी। बातचीत से आज़ाद को आभास हुआ कि गरीबी के कारण विधवा की बेटी की शादी में कठिनाई आ रही है। आज़ाद ने महिला को कहा, 'मेरे सिर पर पाँच हजार रुपए का इनाम है, आप फिरंगियों को मेरी सूचना देकर मेरी गिरफ़्तारी करवाकर पाँच हजार रुपए का इनाम पा सकती हैं जिससे आप अपनी बेटी का विवाह सम्पन्न करवा सकती हैं !

यह सुन विधवा रो पड़ी व कहा- "भैया! तुम देश की आज़ादी हेतु अपनी जान हथेली पर रखे घूमते हो और न जाने कितनी बहू-बेटियों की इज्जत तुम्हारे भरोसे है। मैं ऐसा हरगिज़ नहीं कर सकती।" यह कहते हुए उसने एक रक्षा-सूत्र आज़ाद के हाथों में बाँध कर देश-सेवा का वचन लिया। सुबह जब विधवा की आँखें खुली तो आज़ाद जा चुके थे और तकिए के नीचे 5000 रुपये पड़े थे। उसके साथ एक पर्ची पर लिखा था- "अपनी प्यारी बहन हेतु एक छोटी सी भेंट- आज़ाद।"

हमारे त्यौहार बहुत ही अलौकिक और बहुत से मन , भावना , आदर सत्कार और रिश्तो में बंधे हैं ! हमें अपनी परम्पराओ का ऐसे मान बढ़ाना हैं और पालन करना हैं !
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मंगलज्योति 


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